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Profile
Join date: Jul 26, 2023
About
मृत्युंजय कश्यप यांत्रिक अभियांत्रिकी के चतुर्थ वर्ष का छात्र अवश्य है परंतु संस्थान में उसका परिचय एलडीएस और हिंदी है। हिंदी की उसकी यात्रा मानस के राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद से प्रेमचंद के उपन्यासों की है। कविता लेखन उसके एकांत का साथी है, कहानियाँ भी। यद्यपि उसने आंग्ल काव्य पर भी हाथ आजमाया है तथापि हिंदी में वह सहज है। वह बात-बात में मानस की चौपाइयों अथवा संस्कृत के श्लोकों द्वारा टिप्पणी करता रहता है। उसके पाॅट्-सेट में वह अपनी मातृभाषा मैथिली का जिक्र करना नहीं भूलता। नए दौर में वह अपनी पुरानी विचारधारा के बल चलता है। Black and white is what you see का अनुवाद गीता का “यथेच्छसि तथा कुरु” कैसे हुआ - उससे अवश्य पूछिएगा।
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Mrityunjay
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Kashyap
Posts (49)
Oct 26, 2025 ∙ 1 min
बहुत कुछ था
बुरी कुछ बात थी अच्छा बहुत कुछ था, अगर तुम सुन सको कहना बहुत कुछ था। करें हम दिल-लगी किससे ज़माने में, हँसी में अब उन्हें चुभता बहुत कुछ था। यक़ीनन क़ाबिल-ए-तहरीर हम ना थें, लिखी हर बात को समझा बहुत कुछ था। मिलाते अब नहीं वो भी नज़र हमसे, निगाहों को गिला-शिकवा बहुत कुछ था। लगे अनजान आईने में यह सूरत, वहाँ मुझमें कभी मुझ-सा बहुत कुछ था। तड़पता है दरख़्त-ए-दिल ख़िज़ाँ में यूँ, गँवाया बेवजह अपना बहुत कुछ था। मिलाओ हाँ में हाँ तो नेक मानेंगे, ख़िलाफ़-ए-राय में चुभता बहुत कुछ था। किया करते थे...
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Oct 23, 2025 ∙ 2 min
Pages of Lies
Dear Diary, Black and white are two extremes. You are neither of them, it seems. Nonetheless, I like the colour grey. For black and white – they never stay. You're lucky to have a magnetic flip. Lest, like memories, your pages slip. And a ribbon to mark the last place, Unlike promises lost, leaving no trace! You must cherish your patient pages. –they weigh truth with even gauges. The ink might have stained your skin, But it helps serve the role you are in. Oh! I forgot to inform you about me,...
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Aug 30, 2025 ∙ 1 min
बदल जाएगा
दर्द सीने से कुछ यूँ निकल जाएगा, बहते अश्कों से अंगार जल जाएगा। बा-ख़बर हो के भी तू रहा बेअसर, बेकसी देख पत्थर पिघल जाएगा। आज कर लूँ...
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Mrityunjay Kashyap
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