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ये जवानी है दीवानी


ये जवानी है दीवानी को दर्शकों के सामने आये अब लगभग दस साल पूरे हो चुके हैं और आज भी ये लोगों को बहुत रोमांचित महसूस करवाती है। एक के मन को जोश और उत्साह से भर देने वाली अयान मुखर्जी की यह फिल्म दिखलाती है की कैसे कुछ दोस्त साथ मे सैर पे निकलते हैं और एक दूसरे के बारे मे कुछ नया जानते हैं। यह फिल्म ज़्यादातर बनी (रनबीर कपूर ) के ज़िंदगी और उसके सपनों के क़रीब घूमती है और दिखाती है की कैसे यह सब उसकी दोस्ती और परिवार पे असर करती है।


बनी (रनबीर कपूर ) , अवी (आदित्य कपूर ) और अदिति (कल्कि कोएचिन ) जहाँ एक तरफ बचपन से ही काफी अच्छे दोस्त होते हैं और पहले भी कई बार साथ रोमांचक ट्रिप्स पर जा चुके हैं वही दूसरी तरफ नैना (दीपिका पादुकोण ) पहली बार घर से भाग के और अपनी डॉक्टरी की पढाई से तंग आकर इनके साथ पहाड़ों की सैर पर जाती है। हम इस फिल्म में देखते हैं की कैसे इन सभी दोस्तों की सोच इतनी विभिन्न है। एक तरफ बनी एक जगह ठहरना नहीं चाहता और इस पूरी दुनिया की ख़ूबसूरती को अपनी आँखों में समां लेना चाहता है। वह कहता है की 20 पे नौकरी 25 पे छोकरी 30 पे बच्चे 50 पे रिटायरमेंट और फिर मौत का इंतज़ार एक बेकार ज़िन्दगी के बराबर है। वहीं दूसरी तरफ नैना को एक जगह ठहर कर वहाँ का पूरा आनंद लेना ज़्यादा पसंद है। इस फिल्म में दर्शाएं गए विभिन्न सीन दर्शकों को काफी हसाते हैं।


बनी का इस दुनिया को ले कर एक अलग सोच और उसके सपनो को पूरा करने की हिम्मत रखना काफी प्रेरणा देती है। उसका इतना आकांक्षावादी होना और दुनिया को घूमने की चाह इस फिल्म को एक बेहतर रूप देती है। इस फिल्म के संवाद काफी हसाते है और इस फिल्मों के पात्रों को बहुत ही बेहतरीन रूप से निभाया गया है। बनी के पात्र को रणबीर ने अपने बहुत बेहतरीन अभिनय से निखारा है। उसके संवाद काफी स्पष्ट हैं तथा हास्य के साथ कई बार एक गहरा अर्थ भी रखते है। अदिति यहाँ एक ऐसा पात्र है जो अपने आप को खुलके व्यक्त करती है और दिखलाती है की ज़िंदगी जीने की कोई उम्र नहीं होती। इस फिल्म मे लगभग सभी पत्रों को पर्याप्त समय मिलता है और वह दर्शकों के सामने अपने रंग बिखेर पाते हैं।


अयान मुखर्जी की यह फिल्म कई विभिन्न स्थानों की खूबसूरती को बहुत बेहतरीन तरीकों से दिखलाती है और इसका संगीत झूमने और थिरकने को मजबूर कर देता है।


बनी के लिए फैसले उसकी ज़िंदगी में उसे काफी महत्वपूर्ण चीज़ों से दूर कर बैठते है। वह अपनी ज़िंदगी निश्चित मार्ग पे चलना जानता है । यह फिल्म परिवार और दोस्तों की अहमियत को दर्शाती है। यह फिल्म जहाँ एक तरफ दोस्ती, प्यार और सपनो की अहमियत दिखलाती है वहीं दूसरी तरफ यह भी दर्शाती है की किसी भी इंसान के फैसले उसकी ज़िंदगी के बाकि पहलु पर कितना असर डालते है। यह फिल्म हमें उदाहरण देती है अवि और अदिति के फैसलों का जो उन्हें उनकी ज़िंदगी मे अलग अलग मोड़ पे लाके खड़ा करते है। यह फिल्म हमें एक बहुत जटिल पर हास्य तौर पे दिखाती है की एक इंसान के जीवन में परिवार और सपनों (काम ) का संतुलन कितना महत्वपूर्ण है।

 
 
 

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